2050 में लॉक डाउन एक कहानी होगा।
समय 2050 का जब हम बूढ़े हो जाएंगे। तब हम अपने जमाने मे आयी दुनिया की सबसे बड़ी माहमारी का जिक्र आने वाली पीढ़ी को करेंगे कि बीमारी और माहमारी तो हमने देखी थी। दुनिया मे सदियों से सबसे बड़ी बीमारी। जिसका नाम कोरोना था। लोगो को एक दम से घरो में लॉक डाउन कर दिया था। न जाने कितने लोगों के डंडे पड़े सिर्फ घरो में नही रहने के लिए। न जाने कितनों पर बिना मारकाट और लड़ाई झगड़े के कानून की बड़ी बड़ी धाराएं लगी। डॉक्टर घर घर जाकर जबरदस्ती लोगो को जांच करते थे। पूरी दुनिया एक साथ लॉक डाउन हुई थी। जो लोग अपने अपने घरों से दूर थे उनको घर पहुचने में पैदल 1000 से 1500 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। केरल से एक माँ अपनी स्कुटी लेकर 1400 किलोमीटर का सफर तय करके अपने बेटे को ले गयी अपने घर रास्ते मे हजारो समस्याएं आयी लेकिन माँ तो आखिर माँ होती हैं। दोस्तो को दूर से राम राम और जय माताजी की कहते सुना और देखा। लोगो को गांवो में जाने पर भी पाबंदी लग गयी। गलियों में आते ही डंडो की बरसात होती थी जिसे कोई इनामी बदमाश मिल गया हो। क्या बताऊँ और कई बोलू।
मै अब आपको पूरा किस्सा सुनाने बैठूंगा तो कमर में दर्द और मुँह थक जाएगा। वैसे जो मुख्य बाते उस समय हुई वो मैं तुम्हे बता बताऊंगा ताकि तुम भी कभी भविष्य में ऐसी को माहमारी या कोरोना का भाई वोरोना आये तो हिम्मत से काम लो।
हुआ यो ताकि कोरोना नामक माहमारी जो कि उस समय आज से 30 से 35 साल पहले यानी 2020 के शुरुवाती समय और 2019 के अंत मे चीन के हूबहू के वुहान शहर की लेब्रोटरी जो कि चमगाड़ो पर अनुसंधान कर रहे थे। जिसमें अमेरिका और चीन का सयुंक्त अनुसंधान था। जो पहले अमेरिका में होने वाला था लेकिन अमेरिका के एक सीनियर डॉक्टर ने उस समय 2017 के आसपास जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे तब दुनिया मे अपना दबदबा बनाये रखने के लिए इस अनुसंधान को 3. 7 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देकर चीन में शिफ्ट कर दिया। जब 2017 के अंत मे डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब उसी डॉक्टर ने मीडिया में बताए अनुसार राष्ट्रपति ट्रैम्प से कहा था कि 2020 के आसपास ट्रैम्प को किसी बड़ी माहमारी से लड़ना पड़ेगा। आज 30साल बाद यानी 2050 में आज भी मुझे वो दिन याद हैं कि कैसे हम घरो में कैद हो गए थे कैसे लोग दैनिक जरूरतों को पूरा करने सब्जी दूध और किराने के लिए कम खाने और ज्यादा चलाने का कहते।
सड़को पर पुलिस और बाहर कोरोना का साया। अंदर टीवी पर बाहर का नजारा देख कर लोगो के दिल बैठे जा रहे थे। लेकिन सभी को सुरक्षित रखने के लिए दुनिया के सभी देशों ने लॉक डाउन को ही रामबाण समझा।
आज मेरी नजरे धुंधली हो गयी। बाल पक गए और कितनो न साथ छोड़ दिया। लेकिन वो समय आज भी मुझे याद हैं। जब कोरोना माहमारी से दुनिया मे डेली मौत के अपडेट आ रहे थे।
चलो तुम अंदर जाओ और दादी से बोलो एक कप कड़क चाय बनाये। अभी कहानी लंबी हैं।
और हां तुम अंदर से मेरा गमछा ले आओ ताकि में अपना मुँह पर आ रहे पसीने को साफ करता रहूं। पसीना अब आगे और बढ़ जाएगा। क्योंकि समय ही कुछ ऐसा था।
बच्चो चलो हम सभी बाहर पेड़ के नीचे बैठ जाये ताकि उस समय के जैसे अंदर लॉक डाउन का अहसास नही हो।
तो सुनो,
यह लो चाय,इधर रख दो। आओ पास बैठो, देखो मैं बच्चो को 2020 के कोरोना लॉक डाउन की हकीकत बता रहा हूँ।
अच्छा तुम्हे अंदर काम हैं। कोई बात नही मैं इनको वो भयावह 2020 के कोरोना साये की हकीकत बताता हूं।
चलो बच्चो मैं चाय पिता रहूंगा और तुम्हे 2020 में आये कोरोना नामक माहमारी की पूरी हकीकत बताता हूँ। लेकिन रोज एक घंटे,इतनी लंबी दस्ता एक साथ नही बता पाऊंगा।
आज 22 मार्च 2050 का दिन हैं मतलब भारत मे उस समय दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और भारत की धड़कन प्रधानमंत्री जी थे जिनका नाम था माननीय श्रीमान नरेंद्र दामोदर दास मोदी।
अगर वो नही होते तो देश पूरा खाली हो गया होता और तुम आज मेरे से और अपनी दादी से कहानिया नही सुन रहे होते।
मेरे जैसे कितने ही दादा दादी आज भी अपने अपने बच्चो को कहानिया नही सुना रहे होते।
हाँ तो उस दिन यानी 22 मार्च 2020 से पहले 19 मार्च 2020 को प्रधानमंत्रीजी ने घोषणा की थी कि 22 मार्च 2020 को कोरोना नामक माहमारी से बचने के लिए एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया जाएगा।
जिसमे धारा 144 अर्थात कोई भी शख्श अपने घर से नही निकलेगा। और पूरा देश हिल गया। कि कुछ तो बड़ा कारण हैं। मेरी समझ का पहला दिन था जब सम्पूर्ण देश मे एक साथ ताला लगा कर्फ्यू लगा। 22 मार्च 2020 को पूरा देश घरो में था। और कोई बाहर नही निकला सिर्फ सरकारी कर्मचारी जोकि स्वास्थयकर्मी,पुलिस और सफाई कर्मचारी के अलावा कोई नही। शाम को जो प्रधान मंत्रीजी ने पहले ही अपील की थी कि जो कोरोना वोररिर्स इस माहमारी को खत्म करने में लगे हुए हैं उनके लिए ताली और थाली बजाना हैं समय रखा गया शाम पांच बजे। जगह बताई गई अपने अपने घरों की बालकनी,छत या खिड़की।
सभी अंदर बैठे और पूरे देश ने 22 मार्च 2020 के दिन जनता कर्फ्यू का पालन किया और शाम को सभी लोगो ने बढ़ चढ़ कर तालिया,थालिया,घंटिया,शंख,पटाखे से कोरोना वॉरियर्स का स्वागत व आभार जताया। छोटे छोटे बच्चे यानी उस समय तुम्हारे पापा और मम्मी भी कही थाली और ताली बजाने में लगे थे।
लगता हैं अब थोड़ी थकान आ रही हैं इसलिए बच्चो अगली कहानी कल सुनाऊंगा। चलो अभी थोड़ा आराम करूँगा। है राम ऐसा समय वापस मत दिखाना। जय श्री राम बच्चो।
मै अब आपको पूरा किस्सा सुनाने बैठूंगा तो कमर में दर्द और मुँह थक जाएगा। वैसे जो मुख्य बाते उस समय हुई वो मैं तुम्हे बता बताऊंगा ताकि तुम भी कभी भविष्य में ऐसी को माहमारी या कोरोना का भाई वोरोना आये तो हिम्मत से काम लो।
हुआ यो ताकि कोरोना नामक माहमारी जो कि उस समय आज से 30 से 35 साल पहले यानी 2020 के शुरुवाती समय और 2019 के अंत मे चीन के हूबहू के वुहान शहर की लेब्रोटरी जो कि चमगाड़ो पर अनुसंधान कर रहे थे। जिसमें अमेरिका और चीन का सयुंक्त अनुसंधान था। जो पहले अमेरिका में होने वाला था लेकिन अमेरिका के एक सीनियर डॉक्टर ने उस समय 2017 के आसपास जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे तब दुनिया मे अपना दबदबा बनाये रखने के लिए इस अनुसंधान को 3. 7 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देकर चीन में शिफ्ट कर दिया। जब 2017 के अंत मे डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब उसी डॉक्टर ने मीडिया में बताए अनुसार राष्ट्रपति ट्रैम्प से कहा था कि 2020 के आसपास ट्रैम्प को किसी बड़ी माहमारी से लड़ना पड़ेगा। आज 30साल बाद यानी 2050 में आज भी मुझे वो दिन याद हैं कि कैसे हम घरो में कैद हो गए थे कैसे लोग दैनिक जरूरतों को पूरा करने सब्जी दूध और किराने के लिए कम खाने और ज्यादा चलाने का कहते।
सड़को पर पुलिस और बाहर कोरोना का साया। अंदर टीवी पर बाहर का नजारा देख कर लोगो के दिल बैठे जा रहे थे। लेकिन सभी को सुरक्षित रखने के लिए दुनिया के सभी देशों ने लॉक डाउन को ही रामबाण समझा।
आज मेरी नजरे धुंधली हो गयी। बाल पक गए और कितनो न साथ छोड़ दिया। लेकिन वो समय आज भी मुझे याद हैं। जब कोरोना माहमारी से दुनिया मे डेली मौत के अपडेट आ रहे थे।
चलो तुम अंदर जाओ और दादी से बोलो एक कप कड़क चाय बनाये। अभी कहानी लंबी हैं।
और हां तुम अंदर से मेरा गमछा ले आओ ताकि में अपना मुँह पर आ रहे पसीने को साफ करता रहूं। पसीना अब आगे और बढ़ जाएगा। क्योंकि समय ही कुछ ऐसा था।
बच्चो चलो हम सभी बाहर पेड़ के नीचे बैठ जाये ताकि उस समय के जैसे अंदर लॉक डाउन का अहसास नही हो।
तो सुनो,
यह लो चाय,इधर रख दो। आओ पास बैठो, देखो मैं बच्चो को 2020 के कोरोना लॉक डाउन की हकीकत बता रहा हूँ।
अच्छा तुम्हे अंदर काम हैं। कोई बात नही मैं इनको वो भयावह 2020 के कोरोना साये की हकीकत बताता हूं।
चलो बच्चो मैं चाय पिता रहूंगा और तुम्हे 2020 में आये कोरोना नामक माहमारी की पूरी हकीकत बताता हूँ। लेकिन रोज एक घंटे,इतनी लंबी दस्ता एक साथ नही बता पाऊंगा।
आज 22 मार्च 2050 का दिन हैं मतलब भारत मे उस समय दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और भारत की धड़कन प्रधानमंत्री जी थे जिनका नाम था माननीय श्रीमान नरेंद्र दामोदर दास मोदी।
अगर वो नही होते तो देश पूरा खाली हो गया होता और तुम आज मेरे से और अपनी दादी से कहानिया नही सुन रहे होते।
मेरे जैसे कितने ही दादा दादी आज भी अपने अपने बच्चो को कहानिया नही सुना रहे होते।
हाँ तो उस दिन यानी 22 मार्च 2020 से पहले 19 मार्च 2020 को प्रधानमंत्रीजी ने घोषणा की थी कि 22 मार्च 2020 को कोरोना नामक माहमारी से बचने के लिए एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया जाएगा।
जिसमे धारा 144 अर्थात कोई भी शख्श अपने घर से नही निकलेगा। और पूरा देश हिल गया। कि कुछ तो बड़ा कारण हैं। मेरी समझ का पहला दिन था जब सम्पूर्ण देश मे एक साथ ताला लगा कर्फ्यू लगा। 22 मार्च 2020 को पूरा देश घरो में था। और कोई बाहर नही निकला सिर्फ सरकारी कर्मचारी जोकि स्वास्थयकर्मी,पुलिस और सफाई कर्मचारी के अलावा कोई नही। शाम को जो प्रधान मंत्रीजी ने पहले ही अपील की थी कि जो कोरोना वोररिर्स इस माहमारी को खत्म करने में लगे हुए हैं उनके लिए ताली और थाली बजाना हैं समय रखा गया शाम पांच बजे। जगह बताई गई अपने अपने घरों की बालकनी,छत या खिड़की।
सभी अंदर बैठे और पूरे देश ने 22 मार्च 2020 के दिन जनता कर्फ्यू का पालन किया और शाम को सभी लोगो ने बढ़ चढ़ कर तालिया,थालिया,घंटिया,शंख,पटाखे से कोरोना वॉरियर्स का स्वागत व आभार जताया। छोटे छोटे बच्चे यानी उस समय तुम्हारे पापा और मम्मी भी कही थाली और ताली बजाने में लगे थे।
लगता हैं अब थोड़ी थकान आ रही हैं इसलिए बच्चो अगली कहानी कल सुनाऊंगा। चलो अभी थोड़ा आराम करूँगा। है राम ऐसा समय वापस मत दिखाना। जय श्री राम बच्चो।
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