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परिवर्तन

परिवर्तन से डरे नही। आप कुछ अच्छा खो सकते हैं। लेकिन आप कुछ बेहतर पा भी सकते हैं।                                गौतम बुद्ध गौतम बुद्ध के द्वारा कहा गया कथन वास्तविक सत्य हैं। जब भी दुनिया मे परिवर्तन होता हैं तो उसका कुछ नुकसान और कुछ फायदा भी होता हैं। जब कभी कुछ फायदा होता हैं तो उसका कुछ नुकसान होता हैं। अब कौनसा परिवर्तन पहले आता हैं। वही मायने रखता हैं। अच्छा और मन को भाने वाला परिवर्तन पहले आ जाये तो खुशी मिलती हैं। वही अगर दिल को न भाने वाली खुशी पहले मिलती हैं तो मन मे दुख होता लेकिन बाद में सम्पूर्ण परिवर्तन के दोनों पक्षो को यदि देखे तो अच्छे और बुरे दोनो परिवर्तनों को देखा जा सकता हैं।   इस दुनिया मे जो कुछ होता हैं वो सदैव एक अनिश्चित परिवर्तन होता हैं। यानी जो परिवर्तन अभी हुआ हैं वो अनिश्चित हैं अस्थायी हैं। यानी जब समय आएगा वो भी बदल जायेगा। यानी बदलाव और परिवर्तन सदैव इस जहांन की परंपरा रही हैं और आगे भी रहेगी।   गीता में भी यही लिखा हैं। क्या लाया जो रोता हैं। क्या ले जा...

घरो में बंद रहने की यादों को सहेजकर रखियेगा।

कभी वक़्त सदैव एक जैसा नही रहता। कितना ही अँधेरा हो हर गहरे अंधेरे की सुबह होती हैं। कभी बरसात की रात या बदल होने सूर्य कुछ समय ज्यादा देर से दिखता हैं लेकिंन सूर्य निकलता जरूर हैं।  ठीक वैसे ही धीरे धीरे कोरोना नामक वक़्त या यों कहें कि बुरा वक्त निकल जायेगा। कोरोना माहमारी की औकात मानव के सामने जब थक जाएगी। जब कोरोना माहमारी का इलाज संभव हो जाएगा। तब लॉकडाउन और कर्फ्यू खुल जाएंगे। हम लोग एक वृक्ष पर जिस प्रकार रात गुजारने वाले पक्षी एक पेड़ पर प्रत्येक रात्रि को आते हैं और भोर की पहली किरण के साथ फिर उड़ जाते हैं। अपने दाना पानी के लिए निकल जाते हैं। ठीक वैसे ही जब कोरोना माहमारी से मुक्ति मिल जाएगी तब फिर हम उसी वृक्ष की तरह अपने अपने घरो को छोड़कर निकल पड़ेंगे अपने अपने कामो पर जिससे अपनी अपनी जरूरते पूरी हो सके लंबे समय बाद एक बार फिर वही बाजार,मॉल, दुकाने,जिम या बस डिपो,रेलवे स्टेशन हवाई अड्डा या वो सभी जिनसे हमारा तलूक हैं और जो हमारे लिए आवश्यक हैं। सभी वाला गली से गुजरेगा,दूध या अन्य जरूरत वाले सभी आवाजे देंगे लेकिन अब इनका महत्व जितना लॉकडाउन में था उतना नही। इनकी आवाजे लॉक ...

लॉक डाउन में अभाव का आनंद

इस धरती पर जो भी जातियां और धर्म हैं वो सभी किसी न किसी परम शक्ति को अपने चित्त में मानते हैं और उसका अनुभव धारण करते हैं।   इस परम शक्ति से हम सभी अलग अलग नामो और नियमो में कुछ न कुछ मांगते हैं। मांगने में सदा हम सभी सुख ही मांगते हैं। कभी कोई दुख तो मांगता ही नही। न ही दुख की कोई कामना करता हैं। सदा हमारे चारों तरफ सुख की लहर बहती रहे। ऐसा हम सभी की चाहत हैं। भक्ति और शक्ति का मुख्य मार्ग भी हम इसी लिए इख्तियार करते हैं।   लेकिन परम शक्ति जिसका अपना नियम हैं। जिसका अपना तय नियम हैं। सरकारी संस्थाओं के नियम ही अपने आप मे कितने कठोर  होते हैं। जनता व संस्कृति समाज,धर्म व सम्पूर्ण प्रकर्ति को सुचारू चलाने के लिए कानून और नियम हैं। इन नियमो के तहत ही किसी को पद,मैडल व सन्मान मिलता हैं वही इसी जहन में किसी को सज़ा और दंड मिलता हैं।    ठीक वैसे ही इस जहांन को चलाने के लिए परम शक्ति ने भी अत्यंत कड़क और नियमो के अनुरूप कानून बनाये हैं। परम शक्ति के द्वारा बनाये कानूनों को कोई अंश मात्र भी बदल नही सकता।  परम शक्ति ने सम्पूर्ण नियम और कानून प्रकर्ति और जहां...

2050 में लॉक डाउन एक कहानी होगा।

समय 2050 का जब हम बूढ़े हो जाएंगे। तब हम अपने जमाने मे आयी दुनिया की सबसे बड़ी माहमारी का जिक्र आने वाली पीढ़ी को करेंगे कि बीमारी और माहमारी तो हमने देखी थी। दुनिया मे सदियों से सबसे बड़ी बीमारी। जिसका नाम कोरोना था। लोगो को एक दम से घरो में लॉक डाउन कर दिया था। न जाने कितने लोगों के डंडे पड़े सिर्फ घरो में नही रहने के लिए। न जाने कितनों पर बिना मारकाट और लड़ाई झगड़े के कानून की बड़ी बड़ी धाराएं लगी। डॉक्टर घर घर जाकर जबरदस्ती लोगो को जांच करते थे। पूरी दुनिया एक साथ लॉक डाउन हुई थी।  जो लोग अपने अपने घरों से दूर थे उनको घर पहुचने में पैदल 1000 से 1500 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। केरल से एक माँ अपनी स्कुटी लेकर 1400 किलोमीटर का सफर तय करके अपने बेटे को ले गयी अपने घर रास्ते मे हजारो समस्याएं आयी लेकिन माँ तो आखिर माँ होती हैं। दोस्तो को दूर से राम राम और जय माताजी की कहते सुना और देखा। लोगो को गांवो में जाने पर भी पाबंदी लग गयी। गलियों में आते ही डंडो की बरसात होती थी जिसे कोई इनामी बदमाश मिल गया हो। क्या बताऊँ और  कई बोलू। मै अब आपको पूरा किस्सा सुनाने बैठूंगा तो कमर में दर्द और मुँह थ...

लॉकडाउन पार्ट -1

19 मार्च 2020 की शाम को प्रधान मंत्रीजी नरेंद्र मोदी जी ने भारत मे 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू की घोषणा की।  24  मार्च 2020 को 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा के साथ 24 मार्च की रात 12 बजे से सम्पूर्ण भारत मे 21 दिन का लॉकडाउन लग जाएगा। भारत की जनता जो जहा था वहाँ मानो काटो तो खून नही। लोग अंदर से हिल गए। जो लोग घरो से दूर थे या अपने राज्यो और देश से बाहर थे,भले वो विद्यार्थी हो जा नॉकरीं या व्यापारी सभी को अपने घर जाने के लिए रात से ही निकल जाना के लिए अपने अपने ट्रांसपोर्ट साधनों के अलावा हवाई अड्डा ,बस डिपो या रेलवे स्टेशन जिसको जैसा साधन मिले वैसे अपने घरों को लौटना चाहती थी। जहाँ देखो देश के सभी राज्यो के सभी जिलों में सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट स्टेशनों पर जन सैलाब। देश पूरा हलचल में आगया। जहा देखो वही दौड़ भाग। चिंता एक ही कि लॉक डाउन से पहले सभी को अपने अपने घर व अपने प्रियो के पास पहुचना। इधर जो लोग अपने अपने घरो पर या आसपास ही नॉकरीं,व्यापार या कोई काम धंधो में थे वो लगे गए अपने घरों में जरूरी सामान के लिए जिसमे किराने का सामना और अन्य। इधर अपने अपने घरो की तरफ जाने के ...

लेखक परिचय

 मेरा नाम मोती सिंह राठौड़ हैं. मैं जोधपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ. वैसे मेरे परिवार में न कोई लेखक हैं न ही मै बहुत बड़ा लेखक हूँ. कभी कभी कुछ लिख देता हूँ. ऑनलाइन ब्लॉग के रूप में मेरा संकलन कोई विशेष नहीं हैं. कारन कभी अपने से रूबरू होने का मौका ही नहीं मिला। जबकि  लेखन तो है ही अपने आप से रूबरू होनेका विषय। जब तक लेखक भोजन का स्वाद पान के आंनद और घूमने फिरने,भरपूर निंद्रा लेने में मस्त या सुबह से शाम जीवन यापन के लिए आम और खाश  लोग की तरह अपने जीवन को चलाने में लगा रहेगा। तब तक लेखन की वास्तविक पकड़ को साध नहीं पायेगा. लेखक के जीवन में ऊपर लिखी सभी बाते उल्टी हैं अर्थात जो आम और खाश करता हैं लेखक को उससे आगे जाकर सोचना होगा. कम खाना स्वाद के लिए न खाना और जीवन में निंद्रा से लेकर सभी आराम और लुफ्त एक उत्तम लेखक के लिए इन सभी विषय वस्तुओ से दुरी बनाकर रखनी जरुरी हैं. अगर कोई लेखक बनना चाहता है और उसका चित कही टिकता ही नहीं. ध्यान सदैव भटकते मर्ग के समान इधर उधर भागते रहता हैं. जो सांसारिक विषय वस्तुओ में लिप्त रहता हैं. वो भला क्या लेखक बनेगा और क्या लेखन करेगा. ...