लॉकडाउन पार्ट -1
19 मार्च 2020 की शाम को प्रधान मंत्रीजी नरेंद्र मोदी जी ने भारत मे 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू की घोषणा की। 24 मार्च 2020 को 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा के साथ 24 मार्च की रात 12 बजे से सम्पूर्ण भारत मे 21 दिन का लॉकडाउन लग जाएगा।
भारत की जनता जो जहा था वहाँ मानो काटो तो खून नही। लोग अंदर से हिल गए। जो लोग घरो से दूर थे या अपने राज्यो और देश से बाहर थे,भले वो विद्यार्थी हो जा नॉकरीं या व्यापारी सभी को अपने घर जाने के लिए रात से ही निकल जाना के लिए अपने अपने ट्रांसपोर्ट साधनों के अलावा हवाई अड्डा ,बस डिपो या रेलवे स्टेशन जिसको जैसा साधन मिले वैसे अपने घरों को लौटना चाहती थी। जहाँ देखो देश के सभी राज्यो के सभी जिलों में सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट स्टेशनों पर जन सैलाब।
देश पूरा हलचल में आगया। जहा देखो वही दौड़ भाग। चिंता एक ही कि लॉक डाउन से पहले सभी को अपने अपने घर व अपने प्रियो के पास पहुचना।
इधर जो लोग अपने अपने घरो पर या आसपास ही नॉकरीं,व्यापार या कोई काम धंधो में थे वो लगे गए अपने घरों में जरूरी सामान के लिए जिसमे किराने का सामना और अन्य। इधर अपने अपने घरो की तरफ जाने के लिए जन सैलाब और इधर घरो के लिए जरूरी समान और इधर सरकरी एजेंसीज निकल पड़ी अपने सेवाओ को जनता के लिए देने में।
पहले लॉक डाउन को खत्म अवधि थी 14 अप्रैल 2020 मतलाब 21 दिन देश बन्द। ऐसे में किसी को कुछ सूझ नही। जानता को कुछ समझ ही नही आ रहा था।
उद्योग धन्धो से लेकर सभी कामो व दुकानों पर ताले। न मजदूर और न ही उद्योग कर्मी। कोरोना एक अदृश्य दुश्मन बनकर दुनिया के अमन और चैन को खा जाने के लिए आतुर। कोरोना ने तांडव केवल भारत ही नही दुनिया की महानतम देश अमेरिका,चीन,इटली,ब्राज़ील,फ्रांस,स्पेन,जापान इंडोनेशिया व अन्य सभी देश।
इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की दुनिया मे फैल रहे अनजान दुश्मन कोरोना नामक अदृश्य दुश्मन से लड़ने की गाइड लाइन।
इधर डिक्टर्स,नर्सेज,पुलिस व सफाई कर्मचारियो ने संभला कोरोना नामक महामारी से निपटने के लिए। जनता घरो में दुबक गए और सरकार की सभी एजेंसीज सड़को पर।
500 वर्षो में हर सदी के निश्चित वर्ष 1620,1720,1820,1920 और 2020 में माहमारी ने अपने पैर पसारे थे। लेकिन 2020 की माहमारी बाकी महामारियों से भिन्न हैं। यह एक पनेदिमिक बीमारी हैं जो कि एक साथ पूरी दुनिया मे फैल गयी हैं।
पूरी दुनिया अपने अपने देश के लिए लड़ रही हैं। ऐसे में करे तो क्या करे। दुनिया का प्रत्येक देश दुसरो को कोई सहायता दे इससे पहले अपने देश की तरफ ध्यान देना जरूरी समझ रहा था ऐसे में भारत ने अमेरिका,ब्राज़ील और स्पेन को कुछ आवश्यक दवाईओ को भेज कर अपनी सहायता प्रदान की।
दोस्तो, आप और हमने इससे पहले ऐसी किसी माहमारी को नही देखा और न सुना। लेकिन हम इस माहमारी को देख रहे हैं जी रहे हैं। महसूस कर रहे हैं आँखों के सामने मौत नाच रही हैं। दिखाई नही दे रही हैं। लोग अपनो से बिछड़ रहे हैं। क़ुरइंटिन व आइसोलेशन के अलावा कोई जरिया नही,जगह जगह पर छिड़काव और साफ सफाई के साथ एक दूसरे से सोशल डिस्टेन्स और अन्य तैयारिया ही मुख्य और आवश्यक कह रही हैं सरकार।
देश और दुनिया मे आज सभी अपने अपने देश की सरकारे जनता के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही हैं। लक्ष्य जनता का कोरोना नामक माहमारी से बचाव।
दान दाताओ ने अपनी तरफ से दान देना और जिनके पास खाने पीने की सुविधा नही उनको सेवाभावी लोगो ने अपनी अपनी सेवा देनी शुरू की।
शहर हो या गॉंव चारो तरफ लोगो के मन मे खोफ। हर तरफ चौपालों से लेकर गॉँव की बैठकों पर इस माहमारी की चर्चा और वो भी सोशल डिस्टेंस के साथ।
ये माहमारी ऐसी आयी कि कोई साथ साथ बड़े ग्रुप या बैठकों में बैठ कर चर्चा नही कर सकते। कितनी चिंता का विषय हैं कि एक ऐसी मौत का साया जिसमे सोशल डिस्टेंस अर्थात पति पत्नी को भी एक दूसरे से अलग रह कर अपने आप को सुरक्षित रखना जरूरी हो गया। आज वास्तव में लोगो को पता चल रहा हैं कि मौत के कई रूप हो सकते।
कोरोना ने सम्पूर्ण दुनिया को कर दिया हैं लॉकडाउन अर्थात दुनिया हुई ताले में बंद।
दुनिया का क्या होगा। दुनिया कैसे इस समस्या का सामना करेगी। दुश्मन कोई दिखने वाला मानव नही दुश्मन अदृश्य और वो भी सूक्षम।
लॉकडाउन में जंगली जानवर पहुंच गए और खुले में घूम रहे हैं और जो आप और हम बाहर घूम रहे थे वो कैद हो गए घरो में।
आज वास्तव में दुनिया एक अनजान दुश्मन से लड़ रही हैं। अभी तक न तो कोई वैक्सीन हैं और न कोई जल्दी बन सकती हैं। जो दवाईया हैं वो कितनी कारगर होगी या हो रही हैं वो तो अपने आप मे चिंता का विषय हैं।
आज दुनिया मे भय का माहौल बन गया हैं। आज हर तरफ शक और संशय। न जाने कहा से किसे और कैसे कोरोना हो जाएगा और कब कौन कैसे मौत के साये में चला जायेगा कोई समय तय नही।
भारत की जनता जो जहा था वहाँ मानो काटो तो खून नही। लोग अंदर से हिल गए। जो लोग घरो से दूर थे या अपने राज्यो और देश से बाहर थे,भले वो विद्यार्थी हो जा नॉकरीं या व्यापारी सभी को अपने घर जाने के लिए रात से ही निकल जाना के लिए अपने अपने ट्रांसपोर्ट साधनों के अलावा हवाई अड्डा ,बस डिपो या रेलवे स्टेशन जिसको जैसा साधन मिले वैसे अपने घरों को लौटना चाहती थी। जहाँ देखो देश के सभी राज्यो के सभी जिलों में सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट स्टेशनों पर जन सैलाब।
देश पूरा हलचल में आगया। जहा देखो वही दौड़ भाग। चिंता एक ही कि लॉक डाउन से पहले सभी को अपने अपने घर व अपने प्रियो के पास पहुचना।
इधर जो लोग अपने अपने घरो पर या आसपास ही नॉकरीं,व्यापार या कोई काम धंधो में थे वो लगे गए अपने घरों में जरूरी सामान के लिए जिसमे किराने का सामना और अन्य। इधर अपने अपने घरो की तरफ जाने के लिए जन सैलाब और इधर घरो के लिए जरूरी समान और इधर सरकरी एजेंसीज निकल पड़ी अपने सेवाओ को जनता के लिए देने में।
पहले लॉक डाउन को खत्म अवधि थी 14 अप्रैल 2020 मतलाब 21 दिन देश बन्द। ऐसे में किसी को कुछ सूझ नही। जानता को कुछ समझ ही नही आ रहा था।
उद्योग धन्धो से लेकर सभी कामो व दुकानों पर ताले। न मजदूर और न ही उद्योग कर्मी। कोरोना एक अदृश्य दुश्मन बनकर दुनिया के अमन और चैन को खा जाने के लिए आतुर। कोरोना ने तांडव केवल भारत ही नही दुनिया की महानतम देश अमेरिका,चीन,इटली,ब्राज़ील,फ्रांस,स्पेन,जापान इंडोनेशिया व अन्य सभी देश।
इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की दुनिया मे फैल रहे अनजान दुश्मन कोरोना नामक अदृश्य दुश्मन से लड़ने की गाइड लाइन।
इधर डिक्टर्स,नर्सेज,पुलिस व सफाई कर्मचारियो ने संभला कोरोना नामक महामारी से निपटने के लिए। जनता घरो में दुबक गए और सरकार की सभी एजेंसीज सड़को पर।
500 वर्षो में हर सदी के निश्चित वर्ष 1620,1720,1820,1920 और 2020 में माहमारी ने अपने पैर पसारे थे। लेकिन 2020 की माहमारी बाकी महामारियों से भिन्न हैं। यह एक पनेदिमिक बीमारी हैं जो कि एक साथ पूरी दुनिया मे फैल गयी हैं।
पूरी दुनिया अपने अपने देश के लिए लड़ रही हैं। ऐसे में करे तो क्या करे। दुनिया का प्रत्येक देश दुसरो को कोई सहायता दे इससे पहले अपने देश की तरफ ध्यान देना जरूरी समझ रहा था ऐसे में भारत ने अमेरिका,ब्राज़ील और स्पेन को कुछ आवश्यक दवाईओ को भेज कर अपनी सहायता प्रदान की।
दोस्तो, आप और हमने इससे पहले ऐसी किसी माहमारी को नही देखा और न सुना। लेकिन हम इस माहमारी को देख रहे हैं जी रहे हैं। महसूस कर रहे हैं आँखों के सामने मौत नाच रही हैं। दिखाई नही दे रही हैं। लोग अपनो से बिछड़ रहे हैं। क़ुरइंटिन व आइसोलेशन के अलावा कोई जरिया नही,जगह जगह पर छिड़काव और साफ सफाई के साथ एक दूसरे से सोशल डिस्टेन्स और अन्य तैयारिया ही मुख्य और आवश्यक कह रही हैं सरकार।
देश और दुनिया मे आज सभी अपने अपने देश की सरकारे जनता के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही हैं। लक्ष्य जनता का कोरोना नामक माहमारी से बचाव।
दान दाताओ ने अपनी तरफ से दान देना और जिनके पास खाने पीने की सुविधा नही उनको सेवाभावी लोगो ने अपनी अपनी सेवा देनी शुरू की।
शहर हो या गॉंव चारो तरफ लोगो के मन मे खोफ। हर तरफ चौपालों से लेकर गॉँव की बैठकों पर इस माहमारी की चर्चा और वो भी सोशल डिस्टेंस के साथ।
ये माहमारी ऐसी आयी कि कोई साथ साथ बड़े ग्रुप या बैठकों में बैठ कर चर्चा नही कर सकते। कितनी चिंता का विषय हैं कि एक ऐसी मौत का साया जिसमे सोशल डिस्टेंस अर्थात पति पत्नी को भी एक दूसरे से अलग रह कर अपने आप को सुरक्षित रखना जरूरी हो गया। आज वास्तव में लोगो को पता चल रहा हैं कि मौत के कई रूप हो सकते।
कोरोना ने सम्पूर्ण दुनिया को कर दिया हैं लॉकडाउन अर्थात दुनिया हुई ताले में बंद।
दुनिया का क्या होगा। दुनिया कैसे इस समस्या का सामना करेगी। दुश्मन कोई दिखने वाला मानव नही दुश्मन अदृश्य और वो भी सूक्षम।
लॉकडाउन में जंगली जानवर पहुंच गए और खुले में घूम रहे हैं और जो आप और हम बाहर घूम रहे थे वो कैद हो गए घरो में।
आज वास्तव में दुनिया एक अनजान दुश्मन से लड़ रही हैं। अभी तक न तो कोई वैक्सीन हैं और न कोई जल्दी बन सकती हैं। जो दवाईया हैं वो कितनी कारगर होगी या हो रही हैं वो तो अपने आप मे चिंता का विषय हैं।
आज दुनिया मे भय का माहौल बन गया हैं। आज हर तरफ शक और संशय। न जाने कहा से किसे और कैसे कोरोना हो जाएगा और कब कौन कैसे मौत के साये में चला जायेगा कोई समय तय नही।
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