परिवर्तन
परिवर्तन से डरे नही।
आप कुछ अच्छा खो सकते हैं।
लेकिन आप कुछ बेहतर पा भी सकते हैं।
गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध के द्वारा कहा गया कथन वास्तविक सत्य हैं। जब भी दुनिया मे परिवर्तन होता हैं तो उसका कुछ नुकसान और कुछ फायदा भी होता हैं। जब कभी कुछ फायदा होता हैं तो उसका कुछ नुकसान होता हैं। अब कौनसा परिवर्तन पहले आता हैं। वही मायने रखता हैं। अच्छा और मन को भाने वाला परिवर्तन पहले आ जाये तो खुशी मिलती हैं। वही अगर दिल को न भाने वाली खुशी पहले मिलती हैं तो मन मे दुख होता लेकिन बाद में सम्पूर्ण परिवर्तन के दोनों पक्षो को यदि देखे तो अच्छे और बुरे दोनो परिवर्तनों को देखा जा सकता हैं।
इस दुनिया मे जो कुछ होता हैं वो सदैव एक अनिश्चित परिवर्तन होता हैं। यानी जो परिवर्तन अभी हुआ हैं वो अनिश्चित हैं अस्थायी हैं। यानी जब समय आएगा वो भी बदल जायेगा। यानी बदलाव और परिवर्तन सदैव इस जहांन की परंपरा रही हैं और आगे भी रहेगी।
गीता में भी यही लिखा हैं।
क्या लाया जो रोता हैं।
क्या ले जाएगा जो रोता हैं।
कौन तेरा हैं जो पछताता हैं।
कौन कब किस अवस्था मे कैसे पर तेरा कोई अधिकार नही।
आज जो तेरा हैं जाने वाले कल में किसी और का था।
आज तेरा हैं और आने वाले कल में किसी और का होगा।
परिवर्तन सृष्टि का नियम हैं।
वर्ष से महीने दिन सभी परिवर्तन की कड़ी हैं।
हमारा शरीर बजी जन्म से लेकर मरण तक परिवर्तन में चलता हैं। लेकिन एक बात हमे सदैव याद रखनी हैं कि परिवर्तन सदैव असहाय और दुखद होता हैं लेकिन समय के साथ सुखद हो ही जाता हैं।
जब माता पिता अपनी नंन्ही चिरैया अर्थात बेटियां की शादी करते हैं और जब विदाई का समय आता है तब या जब से शादी तय होती हैं पूरा परिवार अंदर से अत्यंत टूट जाता हैं कि जो चिड़िया हमारे आंगन में बेख़ौफ़ और बिना डर और भय के रहती हैं वो अब उड़ जाएगी एक अनजान जगह और परिस्तिथि में। लेकिन क्या यह सत्य हैं क्या यह परिवर्तन दुखद हैं हमारा जवाब होगा नही। कतई नही। क्योकि यह बदलाव ही एक नई दुनिया और नई सृष्टि का निर्माण करेगा।
और इसलिए बुद्ध ने सही कहा था परिवर्तन की हमेशा दुखद नही होता।
2020 में कोरोना नामक माहमारी में जो दुनिया तालो में बन्द हो गयी या जबरदस्ती की गई। अगर गौर किया जाए और सुखद पहलू देखा जाए तो दुनिया मे करोड़ो परिवर्तन हुए हैं।किसी भी स्तिथि को जीने और समझने में अंतर,कैसे किसी मुश्किल घड़ी में भी संभला जा सकता हैं। कौन उदंडता करेगा तो क्या सजा मिलेगी। लोगो ने डॉक्टर्स पर हमला किया तो एक कानून जो पिछले 120 साल से पड़ा था वो अमल में लाया गया। पहले की पोलिसिंग और आज की पोलिसिंग में क्या अंतर आया। कैसे इस मुश्किल घड़ी के कारण पुलिस का डर और प्यार जनता ने देखा और समझा। जनता ने जाना कि पुलिस नियम तोड़ने वालों को सजा देती हैं तो नियमो को मानने वाले अच्छे लोगो को सन्मान भी देती हैं। कैसे पुलिस इस मुश्किल घड़ी में सुरक्षा के साथ साथ देवदूत बनकर अजने परिवार की चिंता छोड़कर सड़को में मौत को मात देने के लिए खड़ी हैं। कैसे डॉक्टर्स अपनी उत्तम सेवाएं दे रहे हैं सरकार कैसे अपने नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। कैसे निकम्मे और आवारा लोगो को नियम सिखाये जा रहे हैं नियम न मानने पर किसी विशेष अवस्था मे क्या किया जा सकता हैं कैसे मानवता व प्रकर्ति के लिए समाधान हैं और भविष्य में इस माहमारी से सिख लेकर कैसे उत्तम परिवर्तन किये जा सकते हैं।
आज पूरी दुनिया एक मजबूत परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं। देश,राज्य,जिले,तहसील,गांव,नगर,वाड़ी और ढाणी से लेकर एक इंसान से भीड़ या समुदाय कैसे किसी परिवर्तन को झेल सकता हैं और भविष्य में कैसे झेला जा सकता हैं।
क्या आज सम्पूर्ण सरकारी तंत्र और जनता ने एक नया परिवर्तन नही जिया। हम जो एक दो दिन के बंद में भी बोखला जाते थे या चिंता में पड़ जाते थे। जब कभी भी दुनिया के किसी देश,शहर या गॉंव में कर्फ्यू लगता था तो चारो तरफ चर्चाओं व चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे जाती थी। 5 दिन से ज्यादा कर्फ्यू तो मानो जिन्दगि गयी।
मैं 2016 से 2020 को भारत के लिए परिवर्तन का महायुग मानता हूँ। 2016 मै नोटबन्दी,2020 में धारा 370 से लेकर राममंदिर,तीन तलाक के साथ साथ कई कानून अन्य जैसे डॉक्टर्स पर हमला करने के बाद सजा का प्रावधान,कोरोना से लड़ने के लिए सम्पूर्ण देश का तंत्र एक साथ एक कदम निकल पड़ा हैं एक परिवर्तन के लिए। भ्रस्टाचार का अंत दुनिया अब अच्छा और बुरा भले समय हो या व्यक्ति सब जान चुकी हैं।
कुल मिलाकर दुनिया को यह भी पता चल गया हैं कि परिवर्तन कभी भी हो सकता हैं अर्थात परिवर्तन के लिए तैयार रहे। परिवर्तन ही संसार का नियम हैं।
लॉक डाउन में जो बदलाव आवश्यक रूप से दुनिया को करने पड़े उसमे शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव किया जा रहा हैं और हो भी रहा हैं।
तेजी से बदलते समय के साथ आपको भी नई विधियां व तकनीकी के साथ बदलने की आवश्यकता हैं इन दिनों COVID19 के फैलने के कारण शिक्षा प्रदान करने का तरीका भी रातो रात बदल गया हैं यह छात्रों व अध्यापकों के लिए शिक्षण प्रणाली को बदलने का एक महत्वपूर्ण समय हैं।इस परिवर्तन ने शिक्षा में छात्रों की ऑनलाइन और ऑफलाइन अवश्यकताओ को पूरा करने के लिए पूर्णत: तैयारी शुरू हो गयी। सभी इंस्टीटूट व आफिस बन्द हैं। फिर भी बच्चों के लिए सभी फैकल्टी अपने अपने घरो से ही पूरी निष्ठा से लाइव शिक्षण तकनीकी के उपयोग से छात्रों को प्रतिदिन ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।
कैसे सभी ऑफिसियल कार्यो को घरो से ही ऑपरेट किया जा रहा हैं। जब कोई 2015 के आसपास बोलता था कि वर्क फ्रॉम होम तो लोग इसको बकवास मानते थे। लेकिन आज सम्पूर्ण सरकारी या गैर सरकारी और व्यापार घरो से ही चलाये जा रहे हैं। यह परिवर्तन एक नई दिशा और रोजगार को जन्म देगा। अब विदेशो की तरह घरो से काम शुरू हो जाएंगे।
कुल मिलाकर इस कोरोना माहमारी ने यह संकेत दे दिए हैं कि 2020 के बाद धरती पर एक नए युग का परिवर्तन शुरू हो गया हैं। इसलिए कुदरत ने सम्पूर्ण धरती को अंडर कंस्ट्रक्शन ले लिया हैं। पूरी धरती पर परिवर्तन के लिए कुछ समय के लिए ताला ताकि सबकुछ नया शुरू किया जाए।
अब परिवर्तन हैं क्या करेगा पता नही। लेकिन ईश्वर जो भी करेगा उसको हमें मनना होगा।
आप कुछ अच्छा खो सकते हैं।
लेकिन आप कुछ बेहतर पा भी सकते हैं।
गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध के द्वारा कहा गया कथन वास्तविक सत्य हैं। जब भी दुनिया मे परिवर्तन होता हैं तो उसका कुछ नुकसान और कुछ फायदा भी होता हैं। जब कभी कुछ फायदा होता हैं तो उसका कुछ नुकसान होता हैं। अब कौनसा परिवर्तन पहले आता हैं। वही मायने रखता हैं। अच्छा और मन को भाने वाला परिवर्तन पहले आ जाये तो खुशी मिलती हैं। वही अगर दिल को न भाने वाली खुशी पहले मिलती हैं तो मन मे दुख होता लेकिन बाद में सम्पूर्ण परिवर्तन के दोनों पक्षो को यदि देखे तो अच्छे और बुरे दोनो परिवर्तनों को देखा जा सकता हैं।
इस दुनिया मे जो कुछ होता हैं वो सदैव एक अनिश्चित परिवर्तन होता हैं। यानी जो परिवर्तन अभी हुआ हैं वो अनिश्चित हैं अस्थायी हैं। यानी जब समय आएगा वो भी बदल जायेगा। यानी बदलाव और परिवर्तन सदैव इस जहांन की परंपरा रही हैं और आगे भी रहेगी।
गीता में भी यही लिखा हैं।
क्या लाया जो रोता हैं।
क्या ले जाएगा जो रोता हैं।
कौन तेरा हैं जो पछताता हैं।
कौन कब किस अवस्था मे कैसे पर तेरा कोई अधिकार नही।
आज जो तेरा हैं जाने वाले कल में किसी और का था।
आज तेरा हैं और आने वाले कल में किसी और का होगा।
परिवर्तन सृष्टि का नियम हैं।
वर्ष से महीने दिन सभी परिवर्तन की कड़ी हैं।
हमारा शरीर बजी जन्म से लेकर मरण तक परिवर्तन में चलता हैं। लेकिन एक बात हमे सदैव याद रखनी हैं कि परिवर्तन सदैव असहाय और दुखद होता हैं लेकिन समय के साथ सुखद हो ही जाता हैं।
जब माता पिता अपनी नंन्ही चिरैया अर्थात बेटियां की शादी करते हैं और जब विदाई का समय आता है तब या जब से शादी तय होती हैं पूरा परिवार अंदर से अत्यंत टूट जाता हैं कि जो चिड़िया हमारे आंगन में बेख़ौफ़ और बिना डर और भय के रहती हैं वो अब उड़ जाएगी एक अनजान जगह और परिस्तिथि में। लेकिन क्या यह सत्य हैं क्या यह परिवर्तन दुखद हैं हमारा जवाब होगा नही। कतई नही। क्योकि यह बदलाव ही एक नई दुनिया और नई सृष्टि का निर्माण करेगा।
और इसलिए बुद्ध ने सही कहा था परिवर्तन की हमेशा दुखद नही होता।
2020 में कोरोना नामक माहमारी में जो दुनिया तालो में बन्द हो गयी या जबरदस्ती की गई। अगर गौर किया जाए और सुखद पहलू देखा जाए तो दुनिया मे करोड़ो परिवर्तन हुए हैं।किसी भी स्तिथि को जीने और समझने में अंतर,कैसे किसी मुश्किल घड़ी में भी संभला जा सकता हैं। कौन उदंडता करेगा तो क्या सजा मिलेगी। लोगो ने डॉक्टर्स पर हमला किया तो एक कानून जो पिछले 120 साल से पड़ा था वो अमल में लाया गया। पहले की पोलिसिंग और आज की पोलिसिंग में क्या अंतर आया। कैसे इस मुश्किल घड़ी के कारण पुलिस का डर और प्यार जनता ने देखा और समझा। जनता ने जाना कि पुलिस नियम तोड़ने वालों को सजा देती हैं तो नियमो को मानने वाले अच्छे लोगो को सन्मान भी देती हैं। कैसे पुलिस इस मुश्किल घड़ी में सुरक्षा के साथ साथ देवदूत बनकर अजने परिवार की चिंता छोड़कर सड़को में मौत को मात देने के लिए खड़ी हैं। कैसे डॉक्टर्स अपनी उत्तम सेवाएं दे रहे हैं सरकार कैसे अपने नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। कैसे निकम्मे और आवारा लोगो को नियम सिखाये जा रहे हैं नियम न मानने पर किसी विशेष अवस्था मे क्या किया जा सकता हैं कैसे मानवता व प्रकर्ति के लिए समाधान हैं और भविष्य में इस माहमारी से सिख लेकर कैसे उत्तम परिवर्तन किये जा सकते हैं।
आज पूरी दुनिया एक मजबूत परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं। देश,राज्य,जिले,तहसील,गांव,नगर,वाड़ी और ढाणी से लेकर एक इंसान से भीड़ या समुदाय कैसे किसी परिवर्तन को झेल सकता हैं और भविष्य में कैसे झेला जा सकता हैं।
क्या आज सम्पूर्ण सरकारी तंत्र और जनता ने एक नया परिवर्तन नही जिया। हम जो एक दो दिन के बंद में भी बोखला जाते थे या चिंता में पड़ जाते थे। जब कभी भी दुनिया के किसी देश,शहर या गॉंव में कर्फ्यू लगता था तो चारो तरफ चर्चाओं व चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे जाती थी। 5 दिन से ज्यादा कर्फ्यू तो मानो जिन्दगि गयी।
मैं 2016 से 2020 को भारत के लिए परिवर्तन का महायुग मानता हूँ। 2016 मै नोटबन्दी,2020 में धारा 370 से लेकर राममंदिर,तीन तलाक के साथ साथ कई कानून अन्य जैसे डॉक्टर्स पर हमला करने के बाद सजा का प्रावधान,कोरोना से लड़ने के लिए सम्पूर्ण देश का तंत्र एक साथ एक कदम निकल पड़ा हैं एक परिवर्तन के लिए। भ्रस्टाचार का अंत दुनिया अब अच्छा और बुरा भले समय हो या व्यक्ति सब जान चुकी हैं।
कुल मिलाकर दुनिया को यह भी पता चल गया हैं कि परिवर्तन कभी भी हो सकता हैं अर्थात परिवर्तन के लिए तैयार रहे। परिवर्तन ही संसार का नियम हैं।
लॉक डाउन में जो बदलाव आवश्यक रूप से दुनिया को करने पड़े उसमे शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव किया जा रहा हैं और हो भी रहा हैं।
तेजी से बदलते समय के साथ आपको भी नई विधियां व तकनीकी के साथ बदलने की आवश्यकता हैं इन दिनों COVID19 के फैलने के कारण शिक्षा प्रदान करने का तरीका भी रातो रात बदल गया हैं यह छात्रों व अध्यापकों के लिए शिक्षण प्रणाली को बदलने का एक महत्वपूर्ण समय हैं।इस परिवर्तन ने शिक्षा में छात्रों की ऑनलाइन और ऑफलाइन अवश्यकताओ को पूरा करने के लिए पूर्णत: तैयारी शुरू हो गयी। सभी इंस्टीटूट व आफिस बन्द हैं। फिर भी बच्चों के लिए सभी फैकल्टी अपने अपने घरो से ही पूरी निष्ठा से लाइव शिक्षण तकनीकी के उपयोग से छात्रों को प्रतिदिन ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।
कैसे सभी ऑफिसियल कार्यो को घरो से ही ऑपरेट किया जा रहा हैं। जब कोई 2015 के आसपास बोलता था कि वर्क फ्रॉम होम तो लोग इसको बकवास मानते थे। लेकिन आज सम्पूर्ण सरकारी या गैर सरकारी और व्यापार घरो से ही चलाये जा रहे हैं। यह परिवर्तन एक नई दिशा और रोजगार को जन्म देगा। अब विदेशो की तरह घरो से काम शुरू हो जाएंगे।
कुल मिलाकर इस कोरोना माहमारी ने यह संकेत दे दिए हैं कि 2020 के बाद धरती पर एक नए युग का परिवर्तन शुरू हो गया हैं। इसलिए कुदरत ने सम्पूर्ण धरती को अंडर कंस्ट्रक्शन ले लिया हैं। पूरी धरती पर परिवर्तन के लिए कुछ समय के लिए ताला ताकि सबकुछ नया शुरू किया जाए।
अब परिवर्तन हैं क्या करेगा पता नही। लेकिन ईश्वर जो भी करेगा उसको हमें मनना होगा।
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