लेखक परिचय
मेरा नाम मोती सिंह राठौड़ हैं. मैं जोधपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ. वैसे मेरे परिवार में न कोई लेखक हैं न ही मै बहुत बड़ा लेखक हूँ. कभी कभी कुछ लिख देता हूँ. ऑनलाइन ब्लॉग के रूप में मेरा संकलन कोई विशेष नहीं हैं. कारन कभी अपने से रूबरू होने का मौका ही नहीं मिला। जबकि लेखन तो है ही अपने आप से रूबरू होनेका विषय। जब तक लेखक भोजन का स्वाद पान के आंनद और घूमने फिरने,भरपूर निंद्रा लेने में मस्त या सुबह से शाम जीवन यापन के लिए आम और खाश लोग की तरह अपने जीवन को चलाने में लगा रहेगा। तब तक लेखन की वास्तविक पकड़ को साध नहीं पायेगा. लेखक के जीवन में ऊपर लिखी सभी बाते उल्टी हैं अर्थात जो आम और खाश करता हैं लेखक को उससे आगे जाकर सोचना होगा.
कम खाना स्वाद के लिए न खाना और जीवन में निंद्रा से लेकर सभी आराम और लुफ्त एक उत्तम लेखक के लिए इन सभी विषय वस्तुओ से दुरी बनाकर रखनी जरुरी हैं. अगर कोई लेखक बनना चाहता है और उसका चित कही टिकता ही नहीं. ध्यान सदैव भटकते मर्ग के समान इधर उधर भागते रहता हैं. जो सांसारिक विषय वस्तुओ में लिप्त रहता हैं. वो भला क्या लेखक बनेगा और क्या लेखन करेगा.
लेखक तो स्वयं विश्वकर्मा के समन हैं जो जीवन में जितने कड़वे अनुभव लेगा वही उत्तम लेखक बा सकेगा. लेखक कभी कभी न चाहते हुए भी कड़वे अनुभवों के लिए जानभूझकर बुरी और जीवन के अत्यंत दुस्कर और दुर्गम रास्तो पर स्वयं सोच समझ कर निकल पड़ता हैं. दुर्गम यात्रा ही एक लेखक के लिए अतयंत विपुल भंडार होता हैं लेखन का. कलम जब किसी विशेष घटना और विशेष स्तिथि का वर्णन करेगी तभी तो दुनिया में उस लेखक और लेखनी की तव्वजो होगी व् दुनिया किसी विशेष ज्ञान को हासिल कर सकेगी.
AC और बंद कमरों के पंखो और राजसी पकवानो में कोई लेखक नहीं बन सकता। इतिहास में जितने भी लेखक हुए हैं सबका जीवन हकीकत के अत्यंत करीब से गुजरा हैं.
इस समय मैं एक ऐसे युग और इतिहास का गवाह बन रहा हूँ. जो सदियों बाद भी याद किया जायेगा. मुझे याद नहीं किया जायेगा. क्योकि इस समय मै किसी विशेष घटना और त्रासदी की बात कर रहा हूँ. इस समय मैं आज दिनांक 11 अप्रैल 2020 को जोधपुर में हूँ और कोरोना नामक माहमारी से पूरा विश्व स्तब्ध हैं. कुछ समझ नहीं आ रहा हैं. जो देश दुनिया में अपने आप को धुरंधर मानते थे वो आज घुटनो के बल आ गिरे हैं. जिन देशो में सदैव हेकड़ी रही थी की दुनिया के सुपर पावर देश हैं वही देश आज अपने आप को बड़ा असंमजस में पा रहे हैं. जो देश दुनिया में अपने विकास और तरक्की का बखान करते नहीं थकते थे वो आज अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं. इस त्रासदी का मुख्य कारन हैं "कोरोना" नामक एक वायरस जोकि चीन की वुहान शहर से निकल कर अमेरिका,इटली,स्पेन,भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश के साथ साथ पूरी दुनिया के 180 से ज्यादा देशो में फ़ैल गया हैं. कोरोना नामक इस वायरस से बढ़ने वाली बीमारी को अब माहमारी घोषित कर दिया गया हैं.
आज दुनिया खात्मे के दौर से गुजर रही हैं. दुनिया के बड़े बड़े धुरंधरों को कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं. करे तो क्या करे. न तो इस वायरस से लड़ने और कोरोना को ख़त्म करने की न कोई दवा या इंजक्शन हैं. कारन है की यह एक नयी महामारी जिसका पहले से कोई ज्ञान नहीं था. न ही इससे पहले ऐसी बीमारी कभी विश्व में पहले आयी हैं.
डॉक्टरों और वैज्ञानिको ने व् बड़े बड़े रिसर्च करने वाले सैंटिस्टों ने भी इस वायरस को खत्म करने के लिए जो कदम उठाये हैं उनको भी कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं.
इतिहास में प्रत्येक 100 साल बाद प्रकार की माहमारी का उल्लेख हैं और मिलता भी हैं 1620,1720,1820,1920 और अब 2020 यानि प्रत्येक सौ साल बाद कोई न कोई माहमारी आती ही हैं. अगर अंतरास्ट्रीय स्वास्थ्य संघठन ने पिछले सौ के आकड़ो और कोई माहमारी की साइकिल को ध्यान में रखा होता तो आज दुनिया के सामने यह स्तिथि नहीं होती।
आज इस समय जब मै यह लेख लिख रहा हूँ तब मैं अपने घर में कैद हूँ. अर्थात विश्व के तमाम देशो की सरकारों ने एक ही स्वर में कहा हैं की इस बीमारी से निपटने का केवल एक ही जरिया हैं की अपने आपको अपने अपने घरो में लॉकडाउन कर देना अर्थात सभी को मन से या सरकार की तरफ से बल पूर्वक अपने घरो में बंद और साथ ही सभी व्यवसाय से लेकर सभी छोटे बड़े कल कारखानों से लेकर बड़ी से बड़ी फैक्ट्रीज सभी शटडाउन अर्थात लॉकडाउन मतलब अपने आप को तालो में बंद करलो।
आज समय बड़ा कड़वा आगया हैं रोजगार खत्म पेट पालना मुश्किल साथ ही मौत पुरे विश्व में तांडव कर रही हैं सैकड़ो हजरो व् अब तो लाखो तक मौत का आकड़ा पहुँच गया हैं. सबसे पहले मैं एक बात समझ गया हूँ की प्रकृति के सामने सब कुछ शून्य हैं. प्रकृति के सामने कोई कुछ नहीं कर सकता। प्रकृति कब क्या कर दे किसी सुपर पावर की औकात नहीं।
आज मेर साथ आप भी समझ गए होंगे की कोई तो हैं जो प्रत्येक 100 साल बाद एक बार दुनिया अर्थात धरती को रिसेट और रीस्टार्ट करता हैं. आज दुनिया विकास और विकसित कर्म में आगे बढ़ रही हैं लेकिन क्या प्रकृति के सामने अपने आप को बोना महसूस नहीं कर रहे हैं.
मेरा यह ब्लॉग इसी त्रास्दी पर आधारित होगा. जिसमे मैं इस त्रासदी की आँखों देखी घटनाओ के साथ साथ अनुभवों को भी साँझा करूँगा।
लेखक
मोती सिंह राठौड़
जॉइंतरा
Comments
Post a Comment