लॉक डाउन में अभाव का आनंद

इस धरती पर जो भी जातियां और धर्म हैं वो सभी किसी न किसी परम शक्ति को अपने चित्त में मानते हैं और उसका अनुभव धारण करते हैं।
  इस परम शक्ति से हम सभी अलग अलग नामो और नियमो में कुछ न कुछ मांगते हैं। मांगने में सदा हम सभी सुख ही मांगते हैं। कभी कोई दुख तो मांगता ही नही। न ही दुख की कोई कामना करता हैं। सदा हमारे चारों तरफ सुख की लहर बहती रहे। ऐसा हम सभी की चाहत हैं। भक्ति और शक्ति का मुख्य मार्ग भी हम इसी लिए इख्तियार करते हैं।
  लेकिन परम शक्ति जिसका अपना नियम हैं। जिसका अपना तय नियम हैं। सरकारी संस्थाओं के नियम ही अपने आप मे कितने कठोर  होते हैं। जनता व संस्कृति समाज,धर्म व सम्पूर्ण प्रकर्ति को सुचारू चलाने के लिए कानून और नियम हैं। इन नियमो के तहत ही किसी को पद,मैडल व सन्मान मिलता हैं वही इसी जहन में किसी को सज़ा और दंड मिलता हैं।
   ठीक वैसे ही इस जहांन को चलाने के लिए परम शक्ति ने भी अत्यंत कड़क और नियमो के अनुरूप कानून बनाये हैं। परम शक्ति के द्वारा बनाये कानूनों को कोई अंश मात्र भी बदल नही सकता। 
परम शक्ति ने सम्पूर्ण नियम और कानून प्रकर्ति और जहांन के कल्याण के लिए बनाए हैं। जिसको जो कुछ मिलता हैं सम्पूर्ण कर्मो का फल हैं। पिछले रिकॉर्ड के अनुसार इस जन्म में मिलता हैं। पिछले जन्म की छाप इस जन्म में कर्मो के द्वारा देखी जा सकती हैं। 
  ठीक वैसे ही परम शक्ति अपने नियमो से सुख और दुख देती हैं।लेकिन हम यह कल्पना करना छोड़ दो की सदैव हमे वही मिलेगा जो हम चाहते हैं। वो तो केवल चाहने से तो हम अपने बच्चो के वादे पूरे नही करते। तो परम शक्ति अपने नियमो में बदलाव हमारे चाहने से थोड़े ही करेगी।
 जहाँ देखो मंदिर,मस्जिद,गिरझा या फिर गुरुद्वारा हो या अन्य धर्म स्थान सभी मे सुख की कामना करने वालो का ही तांता लगा रहता हैं। हर कोई केवल धर्म स्थानों में माथा इसलिए टेकता हैं कि परम शक्ति उन्हें सिर्फ और सिर्फ सुख ही दे। लेकिन यह अनिवार्य नही। सब कुछ कर्मो के अनुरूप ही मिलेगा। 
  कभी हमने सोचा हैं कि परम शक्ति से क्या मांगना चाहिए। ऐसा क्या एक आशीर्वाद मांगे जिसमे सम्पूर्ण निहित हो। फिर भले सुख आये या दुख सब एक समान और किसी प्रकार का भय नही। न ही चिंता।
   वो एक ही शब्द हैं। 'हे परम शक्ति इतनी शक्ति देना की मैं जीवन के किसी भी मौड़ से पार हो जाऊं।"  इस एक लाइन के बाद आप निश्चित हो सकते हैं। अब यदि आपके कर्म सही दिशा की तरफ नही हैं तो फल मिलेगा। सूर्य की दिशा में बैठोगे तो धूप मिलेगी और उल्टा बैठोगे तो छाव। लेकिन ये दोनों अवस्थाएं जीवन के लिए उपयोगी हैं। सर्दी में जो धूप बहुत भाती हैं लेकिन वही धूप गर्मी में नही भाती तो इसमें परम शक्ति का कोई दोष नही उसने आपके लिए छांव का भी निर्माण किया हैं।अब यह हमारे पर निर्भर हैं कि हम क्या और कैसे जीवन जीते हैं।
  सुख और दुख साधारण लोगो के लिए अलग अलग हैं। कमजोर और लाचार लोग सिर्फ और सिर्फ सुख की कामना करते हैं। वो सदैव सुख की परतं अपने चारों तरफ चाहते हैं। साधारण व्यक्ति कभी भी सुख के अलावा न भक्ति करेगा न ही धर्म स्थान पर जाएगा। कारण अपने जीवन को प्रकर्ति के अन्य पहलुओं पर न जी कर सिर्फ और सिर्फ अपने स्वार्थ और अपने स्वयम के लिए जीना और इस जगह से परम शक्ति दुख शुरू करती हैं। 
   उच्च कोटि के लोगो चाहे किसी धर्म या जाति से हो उनका जीवन जीने का ध्य्य ही असाधारण होता हैं। वो अपने आराम के साथ साथ अन्यो के आराम की भी कामना करते हैं। जन कल्याण और जनता के लिए सदैव कुछ न कुछ करते रहते हैं। सुख और दुख को हकीकत में खत्म करना हैं तो सिर्फ जो मेहनत करने और कर्म करने के बाद मिल रहा हैं जैसा भी मिल रहा हैं उसको स्वीकार करना। अब सभी के जीवन जीने और सफलता पाने की अलग अलग इच्छा हैं। कोई पढ़ना चाहता हैं और डॉक्टर बनकर अपने जीवन यापन के साथ जनता तो उत्तम चिक्तिसा सेवा देता हैं। एक पढ लिख कर डॉक्टर बनकर सिर्फ और सिर्फ अपने आराम और ऐस मौज के लिए गलत से गलत हथकंडे अपना कर किसे भी हो अपना जीवन सुखी बनाना चाहता हैं। फिर वो भले एक आदमी हो या देश,राज्य या कोई। वो सिर्फ इतना ही सोचता हैं कि मेरा उल्लू कैसे सीधा हो। तो उसका फल कैसा होगा। ठीक हैं एक निश्चित समय तक परम शक्ति नजर अंदाज कर देगी लेकिन जिस दिन परम शक्ति बटोरना शुरू करेगी उस दिन स्वाहा। लेकिन इस स्वहा में ऐसे लोगो और प्रकर्ति के अन्य आयामो को नुकसान होगा या होता हैं जिनका लेश मात्र भी  कसूर नही। तो इसमें भी प्रकर्ति का दोष नही वो परम शक्ति तो करती हैं तो फिर बड़े पैमाने पर करती हैं। जिसका नतीजा हैं कोरोना माहमारी,कोरोना वायरस। 
 अब इसमें परम शक्ति की कोई गलती नही  वो तो वही देगी न जो हमने बोया। जो इस लेख को इस समय पढ़ रहे हैं वो सभी अपने अपने दिलो पर हाथ रखे और सोचे कि हमने अभी इस क्षण तक जिंदगी कैसी और कैसे जी हैं। उसका हिसाब उसके मुताबिक ही तो परम शक्ति करेगी। और वही हो रहा हैं ।
  आज अहम और सत्ता के साथ साथ दुनिया मे अपना दबदबा बनाये रखने के लिए चीन ने इस दुनिया का कहा लाकर खड़ा कर दिया। क्या यह परम शक्ति ने किया नही। अगर वर्षा,बाढ़, भूकंप,आगजनी या अन्य कोई बीमारी जो कि प्रकर्ति के अनुरूप फैली होती तो समझ मे आता हैं लेकिन  कोरोना नामक वायरस को वुहान में बनाना और वो भी कुछ देशों को पता होना और आज इससे दुनिया एक ऐसे मौड़ पर आकर खड़ी हो गयी हैं कि शायद आप और हम सोच नही सकते कि आगे क्या होगा।
  एक बात हम दिल पर हाथ रख कर अपनी अंतरात्मा से पूछ सकते हैं कि क्या हम सभी परम शक्ति के अनुरूप और उसके बनाये नियमो में सही चल रहे हैं। तो हमे अपने आप पता चल जाएगा कि क्या सच हैं क्या जुठ।
 चीन ने कोरोना फैलाया और चीन ही उसका वैक्सीन बनाये गया। सिर्फ अपने मुनाफे के लिए इसका मतलब दुनिया परम शक्ति को नही मान रही। परम् शक्ति को छोड़ो हम तो इस समय सरकार जो लॉक डाउन या व्यवस्था कोरोना से बचने के लिए की हैं उसमें भी उदंड और निकम्मे किस्म के विचारों वाले नही मान रहे हैं। तो क्या उनको सरकार दंड नही दे। दंड तो मिलेगा। कारण की कुछ लोग जानबूझ कर बाकी जनता को मौत के गर्त में धकेल रहे हैं। ठीक इसी प्रकार परम शक्ति भी जब धरती पर ज्यादा उदंडता बढ़ जाती हैं या ज्यादा उदंडता फैलती हैं तो फिर कोई बड़ी सजा तय करती हैं।
  आज देश और दुनिया कोरोना नामक माहमारी से पीड़ित हैं। यह दुख हमने नही मंगा लेकिन कर्मो से बिना मांगे आ गया। सम्पूर्ण प्रकर्ति इस समय खतरे में हैं। कुछ विशेष धर्म सम्प्रदाय के लोग अभी भी इस प्रकति के विनाश को बढ़ाने और फैलाने में लगे हुए हैं। कितना ही समझाओ कितना ही मारो।
 लेकिन एक धड़ा हैं जो सभी नियमो को मान रहा हैं भले वो गरीब हैं,तकलीफ में हैं। अन्य कुछ भी सही नही हैं लेकिन सरकार के निर्देशो का पालन कर रहा हैं।  लेकिन मन ही मन चिन्ता हैं कि क्या होगा। कैसे होगा। जीवन का अगला पड़ाव क्या होगा। भविष्य क्या होगा।
क्या इससे पहले मंदिर मस्जिद,चर्च या गुरद्वारे या अन्य धार्मिक स्थान तालो में थे नही। क्या इससे पहले रामनवमी हो या रमज़ान या अन्य त्यौहार तालो में मनाया गया नही। क्या इससे पहले कभी कोई इतने लंबे समय तक बंद रहा नही। क्या इससे पहले आप और हमने कभी इतना लंबा लॉक डाउन देखा नही। तो अब देख लिया इसकी हमने कल्पना थोड़े ही कि थी। इसकी हमने तैयारी थोड़े ही कि थी। लेकिन कहते हैं समय बड़ा बलवान सब कुछ करवा देता हैं। इस समय रामनवमी से लेकर रमजान सभी घरो में मना रहे हैं धर्म स्थानों पर ताले लगे हैं। यह परम शक्ति का इशारा हैं कि हे मानव तुम बहुत उदंड हो गया हैं।
  लेकिन इस समय मैं जो इस लेख में मुख्य बात कहना चाहता हूँ। वो यह हैं कि ये समय गुजर जाएगा,समय अच्छा भी आएगा। लेकिन इस समय सभी धर्म और जातियों को केवल एक ही आशीर्वाद परम शक्ति से मांगना हैं "हे परम शक्ति हमे इतनी हिम्मत देना की बड़े से बड़ा जलजला पार कर जाऊ।".
  अब एक बात अपने मन मे बिठा ले कि दुख हो या सुख हिम्मत और आत्मविस्वाश ही वो शक्ति हैं कि बड़े से बड़ा दुख का सामना हंस कर कर लिया जाता हैं दूसरा इस समय सब कुछ अभाव में चल रहा हैं कुछ भी सही नही जा रहा हैं। सिर्फ और सिर्फ घरो में पड़े हैं उद्योग धंधे बन्द हैं रोजगार बन्द हैं।सब उल्टा कभी सोचा नही था कि ऐसा भी समय आएगा। लेकिन समय का चक्र चलता रहता हैं। सुख और दुख तो आता और जाता हैं।
लेकिन सामना करने के आदत और दुख से लड़ने के आदत डालो,केवल सुख में रहने से पूरा जीवन नही चलेगा। कभी धूप और कभी छांव तो जीवन का हिस्सा हैं। केवल छांव में चलने की कामना करना तो मूर्खता हैं।
  बुरे समय का एक ही मतलब होता हैं कि हमारे मुताबिक नही होना। जैसा हम चाहते हैं वैसा नही होना। तब मन मे दुख और संताप होता हैं। हमें आभाव लगता हैं कि दिन अच्छे नही जा रहे हैं। सब कुछ रुक गया हैं।
लेकिन अभाव में जीने का भी अपना अंदाज हैं अभाव में जीना भी एक कला हैं अभाव में अपने आप को ढालना भी एक आंतरिक शक्ति हैं जिसको सहनशक्ति कहते हैं। जोकि दुनिया का सबसे बड़ा हथियार हैं।बड़े से बड़े दुख और जलजले इस सहनशक्ति नाम के बाण से कट जाते हैं।
 कभी कभी जीवन मे संघर्ष बढ़ जाता हैं। जीवन अपने मुताबिक नही चलता। जीवन में कुछ रस नही रहता। मन मे बुरे समय को देख और जी कर विचलता आ जाती हैं। मन दुखी हो जाता हैं। जीवन मे भय व्यापत हो जाता हैं। चारो तरफ अंधेरे से घिरा जीवन दिखने लगता हैं। जीवन मे अभाव ही आभाव दिखने लगता हैं तभी तो कुशल पुरुष जीवन को सहज और शांति से जीवन जी जाते हैं कि बुरा वक़्त एक अंधी या तूफान की तरह निकल जाता हैं। जब तूफान या अंधी आती हैं तो जंगल के पेड़ शांत होकर उस आंधी या तूफान के  निकल जाने का सिर्फ सामना करते हैं बिना हिले और डरे। डरने से थोड़ा कुछ कम होने वाला हैं। डरने पर तो दुश्मन उलट ज्यादा चढ़ता हैं।
इसलिए बुरे वक्त को जीना भी एक कला हैं और बुरा वक्त ही सीखने के लिए सबसे बड़ी पाठशाला हैं। जो जितना बुरा वक्त देखता हैं या देखेगा वो उतना ज्यादा शक्तिशाली बनेगा। यह प्रकर्ति का नियम हैं।
 जब किसी को ज्यादा बलवान बनाना होता है तो कोई भी संस्था या सरकार या विभाग उसे मजबूत और हार्ड ट्रेनिंग देता हैं। साधारण सैनिक से हार्ड कमांडो की ट्रेनिंग होती हैं। वक सैनिक की इज्जत होती हैं  लेकिन एक कमांडो की इज्जत सैनिक से ज्यादा होती हैं कारण किसी भी मुश्किल घड़ी से लड़ने की ताकत।
 अब शायद आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।
अभाव में भी अपने जीने के अंदाज को बनाये रखे ये दौर गुजर जाएंगे। परम् शक्ति से केवल मांगे

परम शक्ति से प्राथना

" इतनी शक्ति हमे देना दाता मन का विस्वाश कमजोर हो न, इतनी शक्ति हमें देना दाता मैं किसी मुसीबत से डरु न,इतनी शक्ति हमे देना दाता मैं किसी भी समस्या या दुख से डीगु ना। इतनी शक्ति हमें देना दता मैं किसी मुसीबत से घबराऊँ न। इतनी शक्ति मुझे देना दाता हर आभाव में प्रभाव मेरा कम हो न।
इतनी शक्ति हमे देना दाता मैं अपने पथ पर निडर चलाता रहू।

आप देखना आपका जीवन सदैव सफलता की सीढ़ियां चढ़ता रहेगा। दुख और सुख में सदा शांत बने रहेंगे। क्योकि आपने  परम शक्ति का एहसास कर लिया हैं। 

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लेखक परिचय

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